ALPHAGO के 10 धमाकेदार साल: AI ने GO CHAMPION को 4-1 से कैसे हराया?
क्या आपको याद है 2016 का वो ऐतिहासिक पल जब एक AI ने Go के वर्ल्ड चैंपियन को हरा दिया था? आज से ठीक 10 साल पहले, Google DeepMind के AlphaGo ने Go के महान खिलाड़ी Lee Sedol को 4-1 से हराकर सबको हैरान कर दिया। ये सिर्फ एक गेम नहीं था, बल्कि AI की दुनिया में एक ऐसा मोड़ था जिसने दिखाया कि मशीनें इंसानों की सोच से भी आगे जा सकती हैं। चलो जानते हैं इस धमाकेदार मुकाबले की पूरी कहानी।
Thore Graepel, जो खुद एक Go player हैं, बताते हैं कि DeepMind में उनके पहले दिन ही उन्हें AlphaGo के एक शुरुआती version के खिलाफ खेलने को कहा गया। ये तब AlphaGo कहलाता भी नहीं था, बस एक इंटर्नशिप project था जिसे कुछ हज़ार Go games से train किया गया था। Thore nervous थे, लेकिन उन्होंने सोचा कि ये इतना मुश्किल नहीं होगा। Thore बताते हैं कि उन्होंने conservative तरीके से खेला, बस गलती न करने की कोशिश की। लेकिन यही उस AI program की खासियत थी। वो इंसानी professional games पर train हुआ था, इसलिए conventional play के खिलाफ उसे पता था कि क्या करना है। नतीजा ये हुआ कि Thore Graepel हार गए। वो पहले इंसान थे जो officially AlphaGo से हारे। ये उनके लिए एक humbling experience था, लेकिन AlphaGo की काबिलियत का पहला सबूत भी था।
<h2>Move 37: AI का वो कदम जिसने सबको चौंकाया</h2> Lee Sedol के खिलाफ मुकाबले में, AlphaGo ने कुछ ऐसे moves खेले जिन्होंने सबको हैरान कर दिया। खास तौर पर Game 2 में Move 37। Professional commentators ने एकमत से कहा कि कोई भी इंसान खिलाड़ी ये चाल नहीं चलता। AlphaGo ने खुद कहा था कि इस move के इंसान द्वारा खेले जाने की probability 1 in 10,000 थी।Thore Graepel उस वक्त इंग्लिश commentating room में बैठे थे। उन्होंने बताया कि एक American professional Go player उनके बगल में बैठा था और उसने कहा:
Jhakkas के बारे में
Jhakkas लाता है दुनिया के सबसे interesting ideas और interviews. आसान भाषा में, आपकी भाषा में. Tech, काम और future के बारे में articles और podcasts.



