MAX HODAK का बड़ा खुलासा: 40+ लोगों को मिली नई आंखें, BCI का कमाल!
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आप अपनी खोई हुई रोशनी वापस पा सकें तो कैसा होगा? या फिर अगर आपका दिमाग सीधे किसी कंप्यूटर से जुड़ जाए? ये अब सिर्फ साइंस फिक्शन नहीं, बल्कि हकीकत बनने लगा है। Neuralink के Co-founder और Science के Founder Max Hodak ने Brain-Computer Interface (BCI) को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं जो Tech industry को पूरी तरह से बदल देंगे। उनका कहना है कि BCI अब एक नए दौर में आ गया है, जहां कुछ भी मुमकिन है।
Science ने कैसे दी नई आंखें?
Max Hodak की कंपनी Science ने हाल ही में एक बहुत बड़ा clinical trial पूरा किया है। इसमें 40 से ज़्यादा लोगों को उनकी खोई हुई रोशनी वापस मिली है। ये कोई जादू नहीं, बल्कि एक Tiny 2mm x 2mm silicon chip का कमाल है। इस chip को आंख के पीछे retina के नीचे लगाया जाता है।
ये chip असल में छोटे-छोटे solar panels की तरह काम करती है। मरीज़ एक खास तरह के glasses पहनते हैं, जिनमें एक camera लगा होता है जो बाहर की दुनिया को देखता है। फिर एक laser projector आंख के अंदर एक image project करता है। जहां भी laser implant पर पड़ती है, वो light को absorb करती है और सीधे cells को stimulate करती है।
इससे उन rods and cones को bypass किया जा सकता है जो खराब हो चुके होते हैं। इस प्रक्रिया से visual signal वापस retina तक पहुंचता है, जिससे लोग फिर से देख पाते हैं। यूरोप में 17 sites पर हुए इस clinical trial के नतीजे बहुत धमाकेदार रहे हैं। Science अब इसकी approval के लिए apply कर रही है और उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक ये market में आ जाएगा।
BCI क्या है और ये कैसे काम करता है?
जो लोग BCI के बारे में नहीं जानते, उनके लिए Max Hodak समझाते हैं कि BCI क्या है। हमारा दिमाग एक बहुत powerful computer है, लेकिन ये skull के अंदर बंद है। ये चीज़ों से magically connected नहीं है। दिमाग के कुछ connections ही दुनिया से जुड़े होते हैं, जिनसे हमें senses मिलते हैं और हम motor नियंत्रण कर पाते हैं। Max सवाल करते हैं कि क्या हम इन natural connections को किसी और चीज़ से replace करना चाहते हैं, जैसे कि simulated reality या matrix? या फिर हम खोई हुई functionality को restore करना चाहते हैं?
असल में, BCI आज सबसे ज़्यादा खोई हुई functionality को restore करने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। जैसे, अगर कोई blind हो गया है, तो उसे देखने की क्षमता वापस मिल सकती है। अगर वे deaf हो गए हैं, तो उन्हें सुनने की क्षमता वापस मिल सकती है। अगर कोई paralyzed है, तो उसे हिलने-डुलने की क्षमता वापस मिल सकती है। ये वो चीज़ें हैं जो BCI अभी कर रहा है।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। BCI structural neural engineering के बारे में भी है। ये समझना कि दिमाग information कैसे प्रक्रिया करता है। क्या हम दिमाग में नए brain areas जोड़ सकते हैं? क्या हम ये समझ सकते हैं कि दिमाग में क्या चल रहा है, ताकि हम smarter machines बना सकें या depression और addiction जैसी बीमारियों का इलाज ढूंढ सकें? Max का कहना है कि AI में जो प्रगति हुई है, उससे हमें neuroscience के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। पहले हम सोचते थे कि neuroscience AI को सिखाएगा, लेकिन अब ये उल्टा हो रहा है।
Max Hodak का मानना है कि दिमाग को एक computer की तरह देखा जा सकता है। ये एक बहुत अलग architecture है, जैसे कि von Neumann architecture electrical computer से, लेकिन ये information प्रक्रिया करता है। दिमाग में information 12 cranial nerves या 31 spinal nerves के ज़रिए आती-जाती है। इसे दिमाग का API समझो। हमारी reality वही है जो signals इन nerves पर होते हैं। दिमाग environment से magically connected नहीं है; यह reality का एक model बनाता है जिसे हम experience करते हैं।
दिमाग की Plasticity और भविष्य
Neuroplasticity एक बहुत दिलचस्प चीज़ है, जिसे अक्सर गलत समझा जाता है। बचपन में कुछ genuine critical periods होते हैं, अगर आप उन्हें miss कर देते हैं, तो बाद में कुछ चीज़ों को rewire करना बहुत मुश्किल हो सकता है। Max एक उदाहरण देते हैं ऐसे patients का जो जन्म से blurry vision वाले थे क्योंकि उन्हें congenital cataracts थे। जब adulthood में उनकी vision ठीक की गई, तो उनका दिमाग information को समझ नहीं पाया। यह उनके लिए बहुत overwhelming था और कई patients ने तो suicide भी कर लिया। ये दिखाता है कि शुरुआती विकास में कुछ critical periods होते हैं जिन्हें miss करने पर कुछ चीज़ें काम नहीं करतीं।
लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि दिमाग plastic नहीं रहता। Max Hodak कहते हैं कि दिमाग पूरी ज़िंदगी और adulthood में जितना plastic रहता है, लोग उसे उतना appreciate नहीं करते। अगर आप दिमाग के लगभग किसी भी हिस्से में electrode लगा दें और surgery के दौरान patient को जगाएं, तो आप उसे flashing light को नियंत्रण करना सिखा सकते हैं। दिमाग feedback के तहत बहुत plastic होता है। cortical motor decoders इसी तरह काम करते हैं। दिमाग न सिर्फ पहले से मौजूद representations को decode करता है, बल्कि feedback मिलने पर खुद को adapt भी करता है।
पहले के experiments में, scientists ने सिर्फ दो neurons के weights को fix कर दिया था। जैसे, जब ये neuron ज़्यादा fire करे, तो screen पर ऊपर जाओ; जब दूसरा ज़्यादा fire करे, तो screen पर नीचे जाओ। उन्होंने weights fix कर दिए और दिमाग को खुद सीखने दिया। और दिमाग feedback के साथ बहुत अच्छी तरह से सीखता है। इसका मतलब है कि हमारे पास दो सीखते हुए systems हैं जो एक-दूसरे से सीख सकते हैं, बजाय एक fixed system के।
Max Hodak का कहना है कि medicine में drug discovery के मुकाबले neural engineering ज़्यादा effective है। Drug discovery में अक्सर एक दशक लग जाता है और आखिर में पता चलता है कि कोई फायदा नहीं हुआ। कई बार हम किस्मत वाला होते हैं और GLP-1 जैसी कोई चीज़ मिल जाती है, लेकिन ज़्यादातर बार ऐसा नहीं होता। आंखों की रोशनी को ठीक करने के लिए दवाओं पर बहुत काम हुआ है, लेकिन उनका कोई खास असर नहीं हुआ। एक million dollar per patient gene therapy भी है जिसका बहुत कम patients पर मामूली सा ही असर होता है।
इसके उलट, retinal prosthesis में, Science ने एक patient को जो 10 साल से चेहरे नहीं देख पा रहा था, उसे eye chart के हर letter को पढ़ने की क्षमता दी। Max कहते हैं कि दिमाग ही एकमात्र organ है जो सबसे ज़्यादा मायने रखता है, और हम इसे engineer करने में ज़्यादा अच्छे हैं। यह healthcare में एक fundamental reframing और paradigm shift है।
अगले 10 सालों में, Max Hodak को उम्मीद है कि BCI से 20/20 vision जैसी native acuity, color और full field of view मिल पाएगा। अभी हम वहां नहीं हैं, लेकिन रास्ता साफ है। BCI सिर्फ disabled patients के लिए नहीं है। Max का कहना है कि healthy 30-year-olds को जल्द ही BCI नहीं मिलेंगे, लेकिन eventually ज़्यादातर लोग patients बन जाते हैं क्योंकि aging के साथ सब कुछ खराब होता जाता है। एक critical age आती है जब BCI लगाना समझदारी भरा हो जाता है ताकि खोई हुई functionality को restore किया जा सके। और फिर एक ऐसा वक़्त आएगा जब BCI वाले लोगों के पास ऐसी क्षमताएं होंगी जिनसे बाकी लोग jealous होंगे।
Conjoined Twins और Conscious Experience
Conscious experience के बारे में BCI के गहरे सवाल हैं। Max Hodak ने Canada की conjoined twins का उदाहरण दिया, जिनके दिमाग के दो hemispheres एक बड़े biological cable से जुड़े हुए हैं। ये MRI पर साफ दिखता है। इस cable के ज़रिए वे अपने conscious experience के meaningful elements को साझा करो कर सकती हैं।
एक दिलचस्प सवाल ये है कि जब वे एक-दूसरे की आंखों से कुछ हद तक देख सकती हैं, तो क्या ये उन्हें एक नए visual field की तरह दिखता है? ज़्यादातर लोगों के पास दो image modes होते हैं - एक आंखों से देखने वाला और दूसरा कल्पना (imagination) वाला। क्या इन twins के पास तीन या चार image modes हैं? या फिर अगर उनके पास internal monologue है, तो क्या वे इस channel के ज़रिए बिना कुछ कहे आपस में communicate कर पाती हैं? उन्होंने ऐसे tasks किए हैं जहां वे बिना बोले coordinate कर पाई हैं, और वे इसके बारे में conscious भी हैं।
वे इसे एक-दूसरे के लिए confuse भी नहीं करतीं, जैसा कि schizophrenic patients के साथ होता है जहां उन्हें आवाज़ें सुनाई देती हैं जो उन्हें लगता है कि उनके अंदर से आ रही हैं। Twins इसे अलग-अलग बता सकती हैं और इसे सीधे experience करती हैं। तो सवाल ये है कि क्या ये cable classical तरीके से information भेज रहा है या phenomenal binding का कोई असर हो रहा है, जहां दो hemispheres एक moment में बंधे हुए हैं? ये natural case studies हमें बताती हैं कि भविष्य में बहुत दिलचस्प चीज़ें मुमकिन हो सकती हैं, भले ही अभी इसकी कल्पना करना मुश्किल हो।
आप क्या सोचते हो? क्या BCI हमारी ज़िंदगी को पूरी तरह से बदल देगा? टिप्पणी में बताओ!
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